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चीनी  मिल  आंदोलन 

"हे मैथिल जन आबहूँ जागु ।" घर-घर जाई अलख जगबू, सजग पथिक बनी "मील" खुलाबू । पथिक विकासक बनी सब मैथिल, गामही में घर-द्वार बसाबू । चीनी मिल खुलत जन हित में, मैथिल किछु कर्तव्य निभाबु । अहिक विकासक बात करैथ जे, हुनक डेग में डेग मिलाबु । निम्मन दिन ऐबे टा करतें, सब मिल के बिगुल बजाबु । नींद खुलें सरकारक जा धयर, कानक निचा ढोल बजाबु । हे मैथिल जन आबौहु जागु, अहीँक विकासक बात करैथ जे । हुनक डेग में डेग मिलाबु ।। खूब रास शुभकामना के संग... "रजनिश प्रियदर्शी"

रो गेनमा ....अपना गाम म आब चूरा-दही-चिनी के भोज किया ने होइ छे रो ........। ठीके कहें छ यार सब ठाम खाली जतअ देखींही पुरी तरकारी ,पूरी तरकारी ......। मुदा यार चुरा-दही-चिनी क त् बाते किछु और छे । ह रो यार चुरा-दही-चिनी के मिला दिहीं त् त्रिवेणी क संगम भ जाइत अइछ । मुदा आब चिंता ने कर सुनलयि ह जे MSU कें कार्यकर्ता सब चिनी मिल पुनः खोलबाक लेल जोर-सोर सं आंदोलन शुरु केलेंन ह । रो यार ई त् तु बड्ड निक समाचार सुनेलअ अहि आंदोलन स् त् मैथिल समाज के बहूत विकाश हेते । अपनों सब चले-चल हिनका लोकनिक कन्धा स कन्धा मिला के आन्दोलन में भाग ली , आखिर मैथिल हेबाक किछु कर्तव्य त् निभेबे ने.........! ह ह तू ठीक कहें छअ । आई अपन मैथिल समाज के सब गोटे के जतेक नव आ चेतन छी अहि अधिकार के लेल आवाज बुलंद करवाकर आवश्यकता अछि । आउ सब गोटे मिल के संकल्प ली जे माँ मैथिली आ मैथिल समाजक प्रति अपन कर्तव्य के निर्वहन आवशय करब । जय मिथिला , जय मैथिल ,जय मैथिली..................... रजनीश प्रियदर्शी ।

अहि कविता के शीर्षक अइछ " क्रांति चाही " MSU कें समर्पित कार्यकर्त्ता गण के समर्पण में । आऊ चली हम ओही राह आ ओही विचार पर । मिथिला छात्र संगठन के सद्विचार पर । क्रांति चाही पुन: मिथिला के उन्नतिक मार्ग पर । हम सब उठी बजाबि बिगुल, परिवर्तनक मार्ग पर । मैथिल जन सब आई जतेकों बेरोजगार छथि । सबटा पिछा मात्र हमर इ सरकार छैथ । रोकी रखल छेथ मैथिल जन के अधिकार कें ।  आमूल-चुल परिवर्तन सबटा निराधार अईछ । मैथिल जन के चिनी मीलक दरकार अईछ ...... मैथिल जन के चिनी मीलक दरकार अईछ ......। - रजनिश प्रियदर्शी
मिथिला छात्र संगठन के छात्र यूवाओं को समर्पित ये रचना । आशा है ये रचना आपके क्रांतिकारी भाव को और भी सजग करेगा । "ये वक्त यूवाओं का" । उठो मित्रों दिखा दो जोश अपने दिल के लहरों का । है मांग लोगों की तेरे ही जज्बों का एक क्रांति लाने का । जुड़ी है आश सदियों से आएगी सौम्यता एक दिन । तुझे हर हाल में हो कर नया इतिहास रचना है । ये रोड़े बीच में आ कर तुझे हर पल गिराएंगे । वो हर घोल में तुमको हमेशा घुलायेंगे । तुम्हें गिरना नहीं है पत्थरों की ठेस से मित्रों । तुम्हें हर घोल में मिलकर नया मिश्रण बनाना है । तेरे कर्तव्य के हर मार्ग पर कांटे पिरोये हैं । तेरे मंजिल की हर एक राह पर गड्ढे खुदायें हैं । चुभ जाये तो हर दर्द को यूं ही भुलाओ तुम । यूं ही सम्भल कर, एक नया कर्तव् दिखाओ तुम । ये जीवन मिला तुमको कर्तव्यनिष्ठ बनने को । किसी के आश और विश्वास का अभिमान रखने को । जीवन की गति और चाल से कुछ सिख लों मित्रों । ये उनकी आश को परिहास में तुम मत बदलने दो । ये उनकी आश को परिहास में तुम मत बदलने दो ।। (रजनिश प्रियदर्शी )
भैया रो एगो बात बुझल्हींन ..  की रो कह ने .....................  आब अपनों खेत में कुशियार हेते । देख अन्सोहांत सन बात नय बाज........! आब कुसियारक खेती में नफ़ा छे ज़े कुसियार करब । रो भय्या तोरा बुझेनेय बड्ड परिश्रमक गप्प । हमरा सुनबा में एल हाँ ज़े मिथिला छात्र संगठनके क्रन्तिकारी सब बहूत मेहनत क रहल छेथ । बहूत जल्द इ सेनानी सब सफ़ल हौता आ मिथिला में चीनी मिल खुलत । हमर कहब त इ ए ज़े मैथिल जन जन के अहि आंदोलन में तन-मन-धन सं भाग लेबाक चाही । सैह तखन त कुसियार रोपबे करबे.....! चल चल अपनों सब हुनका लोकनिक संग अहि आंदोलन में भाग ली । चले-चल ............!रजनीश प्रियदर्शी
जारी है ......जरी है.............. 
अभियान निरंतर जारी है .....। 
चीनी मिल खुलाने का .........
प्रयास निरंतर जारी है..........।
मैथिल नर और नारी का....... 
आशीष किसी पर भारी है.......। 
चीनी मिल खुलाने का ...........
प्रयास निरंतर जारी है...........।
मैथिल नव और चेतन तुम......
हुँकार भरो......हुँकार भरो........।
ये अधिकार तुम्हारा है.............
हुँकार भरो......हुँकार भरो........।
अपना कर्तव्य निभाना ही.........
मेरी और तेरी, बारी है.............। 
जारी है..........जारी है .............
अभियान निरंतर जारी है ........।
जों अपने लोकेन के इ "अभियान गीत" निक लागल त, हमर इ अपेक्षा ज़े अभियान में एकर उपयोग करी आ फेसबुक पर वा अन्य सोसल मीडिया के कोनो भी उपभाग में बेसी स बेसी मात्रा में शेयर करी । खूब रास शुभकामना के संग अहाँ के "रजनिश प्रियदर्शी" ।www.vicharbindu.com
जय मिथला ...जय मैथिल...जय मैथली ।



भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। 
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ 
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी। 
भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी। 
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता। 
माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता॥ 
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। 
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता। 
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै। 
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै। 
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै। 
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै॥ 
माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा। 
कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा॥ 
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा। 
यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा॥
ll जय श्री सियाराम जी की ll  


बहूत भेल अत्याचार
इ अपनेक कहेन व्यवहार
मैथिल के दियोऊ अधिकार
बहूत भेल अत्याचार
इ अपनेक कहेन व्यवहार
मैथिल के दियोऊ अधिकार
ने करत कियो प्रतिकार
मैथिल जन के एक पुकार
चीनी मिल हमर अधिकार


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